Time left : XX : XX
Hindi Typing Paragraph
वह जो चमकीली, सुंदर, सुघङ इमारत है, वह किस पर टिकी है? इसके कंगूरों को आप देखा करते हैं, क्या कभी आपने इसकी नींव की ओर भी ध्यान दिया है? दुनिया चमक देखती है, ऊपर का आवरण देखती है, आवरण के नीचे जो ठोस सत्य है, उस पर कितने लोगों का ध्यान जाता है? ठोस 'सत्य' सदा 'शिवम्' होता ही है, किंतु वह हमेशा ही 'सुंदरम्' भी हो, यह आवश्यक नहीं। सत्य कठोर होता है, कठोरता साथ जनमा करते हैं, जिया करते हैं। हम कठोरता से भागते हैं। नहीं तो हम इमारत के गीत नींव के गीत से प्रारंभ करते। वह ईट धन्य है, जो कट-छँटकर कंगूरे पर चढ़ती है और बरबस लोक-लोचनों को आपनी ओर आक्रष्ट करती है। किंतु, धन्य है वह ईंट, जो ज़मीन के सात हाथ नीचे जाकर गड़ गई और इमारत की पहली ईंट बनी! क्यों इस पहली ईंट पर, उसकी मज़बूती और पुख्तेपन पर, सारी इमारत की अस्ति-नास्ति निभर करती है? उस ईंट को हिला दीजिए, कंगूरा बेतहाशा ज़मीन पर आ रहेगा। कंगूरे के गीत गाने वाले हम, आइए, अब नींव के गीत गाएँ। वह ईंट , जो ज़मीन में इसलिए गड़ गई कि दुनिया को इमारत मिले, कंगूरा मिले! वह ईंट जो सब ईंटों से ज्यादा पक्की थी, जो ऊपर लगी होती, तो कंगूरे की शोभा सौगुनी कर देती! किंतु, जिस ईंट ने देखा, इमारत की पायदारी उसकी नींव पर मुनहसिर होती है, इसलिए उसने अपने को नींव में अप्रित किया। वह ईंट, जिसने अपने को सात हाथ ज़मीन के सौ हाथ ऊपर तक जा सके। वह ईंट, जिसने अपने लिए अंधकूप इसलिए कबूल किया कि ऊपर के उसके साथियों को स्वच्छ हवा मिलजी रहे, सुनहली रोशनी सिलती रहे। वह ईंट, जिसरे अपना अस्तित्व इसलिए विलीन कर दिया कि संसार एक सुंदर सृष्टि देखे। सुंदर सृष्टि! सुंदर सृष्टि हमेशा ही बलिदान खोजती है, बलिदान ईंट का हो या व्यक्ति का। सुंदर इमारत बने, इसलिए कुछ पक्कि-पक्कि लाल ईंटों को चुपचाप नींव में जाना है। सुंदर समाज बने, इसलिए कुछ तपे-तपाए लोगों को मौन-मूक शहादत का लाल सेहरा पहनना है।